यह दावा करना कि बाइबल के भीतर या बाहर कोई भी मनुष्य परमेश्वर के पुराने नियम के नियमों को बदलने या समाप्त करने का अधिकार रखता है, दिव्य सर्वोच्चता का अपमान है। जो इस भ्रम को मानता है, वह परमेश्वर की वाणी की अपरिवर्तनीयता को अस्वीकार कर रहा है। किसी भी सृजित प्राणी को ऐसा अधिकार नहीं है, जब तक कि परमेश्वर ने उसे स्पष्ट रूप से न दिया हो। लेकिन न तो पुराने नियम में और न ही सुसमाचारों में हमें ऐसी कोई भविष्यवाणी मिलती है जो मसीह के बाद ऐसे अधिकार वाले मनुष्यों की घोषणा करती हो। उद्धार के मामलों में, हमें केवल वही विश्वासयोग्य रहना चाहिए जो परमेश्वर ने यीशु से पहले और स्वयं यीशु के द्वारा हमें प्रकट किया, ताकि हम सर्प द्वारा धोखा न खाएँ। उद्धार व्यक्तिगत है। जब तक जीवित हैं, परमेश्वर का नियम मानें। | उन आज्ञाओं में से न तो कुछ जोड़ो और न ही घटाओ, जो मैं तुम्हें दे रहा हूँ। केवल अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञाओं का पालन करो। (व्यवस्थाविवरण 4:2) | parmeshwarkaniyam.org
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